By: Arun K. Pathak
श्री नीतीश कुमार राजनीतिग्य नहीं राजर्षि हैं जिसे अंगरेजी में Statesman कहा जाता है,, और कोई भी राजनीतिग्य राष्ट्र की उन्नति के लिए अपने निजी अस्तित्व का खतरा उठाने के बाद ही राजर्षि -- Statesman -- में रूपांतरित होता है.बिहार का नेतृत्व यही खतरा उठाने को तैयार है..आज अगर विधायक निधि ख़त्म करने के मुद्दे पर लोग उनका साथ छोड़ दे तो बिहार का जनमानस उनके साथ इस प्रकार एकात्म हो रहा है कि शायद शतप्रतिशत समर्थन प्राप्त हो जाए. एक बात और ..बिहार के लोग अब अपने स्वाभिमान के साथ जाग उठे हैं...अब बिहार के महाजागरण को कोई रोक नहीं सकता.और यही महाजागरण भारत के विश्व-शक्ति बनने की पूर्व शर्त थी. यह नियति की इच्छा थी कि बिहार सशक्त, समृद्ध और सम्मानित बने और श्री नीतीश कुमार और नौ करोड़ बिहारियों ने नियति की इस इच्छा को पहचाना.और उसकी पूर्ति के लिए समर्पित हैं..छोटी या बड़ी कोई भी मछली इस समय जन-समुद्र से विद्रोह करने की स्थिति में नहीं है..क्योकि जन-समुद्र का जल ही सभी मछलियों का जीवन है..जीवन से शत्रुता कौन करेगा..
