40 lac illegal immigrants.
अर्थात- 40 लाख अवैध अप्रवासी
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कोई कहीं नही जाएगा... ध्यान दीजिएगा और ध्यान से पोस्ट पढिएगा 👇👇👇
हां तो 2 -3 दिन से तथाकथित हिन्दू जनता बहुत खुश हो रही थी खासकर अंध चमचे जो कि साहेब भक्ति को ही हिंदुत्व का नाम देते हैं 😀😀
तो आओ ज़रा नज़र उतार दूँ...😠😠
हां तो मित्रो एक घटना का स्मरण हो रहा है जैसा कि मैने पूर्व में पढ़ा था,
बात 1998 की है महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना सरकार की थी मुम्बई कोर्ट के अलग अलग आदेशों के अनुसार 96 लोग अवैध बांग्लादेशी इमिग्रेंट साबित हुए... राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को इस विषय मे सूचना डाल कर सभी अवैध प्रवासियों को कुर्ला एक्सप्रेस में एक डिब्बा रिज़र्व कर अपने सशस्त्र 14 पुलिस बल संख्या के साथ बांग्लादेश बॉर्डर के लिए रवाना कर दिया ताकि पुलिस देख रेख में इन्हें अपने देश बांग्लादेश वापिस भेजा जा सके .. परन्तु हावड़ा स्टेशन पहुंचने से पहले जिस स्टेशन पर गाड़ी रुकी वहां 900 हथियारबंद मुस्लिम शांतिदूत स्वागत के लिए तैयार खड़े थे... वहां उन्होंने सीधा उसी डिब्बे पर हमला किया जिसमे वो अवैध बांग्लादेशी deport करने के लिए ले जाये जा रहे थे.. 14 पुलिस वालों को अपनी सुरक्षा के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी अगर रेलवे पुलिस बल उनको ना निकालता तो उनकी मृत्यु mob lynching के तहत तय ही थी.. यह सब CPI की सरकार के MP की देख रेख में हुआ 2, 4 दिन बाद उस MP हारून असलम ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि "बंगाली बोलने वालों को बांग्लादेशी करार देने वाली महाराष्ट्र सरकार निरीह मुसलमानों पर जुल्म कर रही है यह बर्बर सरकार है.. हालांकि सर्वविदित सत्य यह है कि महाराष्ट्र सरकार सिर्फ कोर्ट के आदेशों का पालन कर रही थी मज़े की बात है कि तत्कालीन वामपंथी सरकार के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने भी इन अवैध प्रवासियों के हक में बयान दिया.. 1980 से 1991 तक महाराष्ट्र सरकार ने 8113 बांग्लादेशियों को deport करने के लिए पश्चिमी बंगाल में भेजा पर बंगाल बॉर्डर पार करते ही उन्हें छुड़वा लिया गया .. कामरेडिओं का राज गया पर बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों की संख्या इतनी है कि वो जो चाहें वही होगा क्योंकि यह संविधान नाम की बीमारी जो है... 😀
इसी संविधानिक कमज़ोरी को मोमता दीदी ने भुनाया.. मोमता दीदी का कोर वोटर भी अवैध बांग्लादेशी ही हैं इसीलिए आसाम से 40 लाख अवैध घोषित हुए बांग्लादेशियों के हक में नागिन बन फुंकार रही है..😜 अब उन अति उत्साहित भक्तजनों को कुछ कहना चाहता हूं यारों 40 लाख लोग जो 1975 से पहले की नागरिकता साबित नही कर पाए क्या उनका परिवार नही है..? 1975 से अब तक 44 साल बीत चुके हैं, जिस हिसाब से इन बेचारो की प्रजनन गति है उस हिसाब से तो 75 में जन्म लेने वाला कम से कम 5 बच्चे और 25 पोतों वाला तो होगा ही.. तो प्रश्न यह है कि अगर यह अवैध हैं तो इनको किधर भेजोगे...🤔🤔
भारत सरकार अगर यह कहेगी कि ये अवैध बांग्लादेशी या अवैध म्यांमार के नागरिक हैं तो क्या वहां की सरकारें मान लेंगी... और अगर ज़बरदस्ती से इन्हें सीमा के पास खड़ा कर दिया और उधर के देश की सरकार यह कह दे कि ये हमारे नही तो क्या कर लेगी भारत की सरकार..?
उधर इनको गोली मारने का आदेश होगा कि जो भी बॉर्डर क्रॉस करे उसे गोली मार दो.. और फिर क्यों भूल जाते हो कि ये जो 4 साढ़े 4 साल से बिना हड्डी के तड़फ रहे कुछ कुत्ते जो NGO, मीडिया वगैरह के छद्म रूप में हैं वो एक क्षण भी नही लगाएंगे वहां पहुंचने में और फिर अंतराष्ट्रीय दवाब, मानवाधिकार संगठन, जेनेवा समझौता कुल मिला कर 40 लाख औऱ उनकी औलादों को अगर वो देश ना लेना चाहें तो क्या कर लोगे...?? एक भी नही जाएगा, लिखवा लो आज ही ये सब वोट बैंक की राजनीति है ताकि लोगो का ध्यान उधर बंटा रहे, साहब के द्वारा किये गए अनगिनत वादों पर ध्यान ही ना जाए किसी का इसलिए एक शगूफा छोड़ दिया गया है कि लगे रहो बिना काम के काम मे ... 😀😀
हां तो साहब के अंध चमचो आपस में उलझने से कुछ नही होने वाला क्योकि सच्चाई यही है ... शान्ति बना के रहो, जियो और सबको जीने दो, साहब को उनके किये वादे याद दिलाओ 4.4 का हिसाब मांगो जानते हो क्यों क्योंकि पार्टियों में जब जनता का डर निकल जाता है तब ये निरंकुश हो जाती है और जनता महत्वहीन.. अपना महत्व बताओ इन पार्टियों को ...
जय श्री राम .... जय माँ भारती
