Friday, August 3, 2018

40 lac illegal immigrants. अर्थात- 40 लाख अवैध अप्रवासी

40 lac illegal immigrants.
अर्थात- 40 लाख अवैध अप्रवासी
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

कोई कहीं नही जाएगा... ध्यान दीजिएगा और ध्यान से पोस्ट पढिएगा 👇👇👇

हां तो 2 -3 दिन से तथाकथित हिन्दू जनता बहुत खुश हो रही थी खासकर अंध चमचे जो कि साहेब भक्ति को ही हिंदुत्व का नाम देते हैं 😀😀

तो आओ ज़रा नज़र उतार दूँ...😠😠

हां तो मित्रो एक घटना का स्मरण हो रहा है जैसा कि मैने पूर्व में पढ़ा था,
बात 1998 की है महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना सरकार की थी मुम्बई कोर्ट के अलग अलग आदेशों के अनुसार 96 लोग अवैध बांग्लादेशी इमिग्रेंट साबित हुए... राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को इस विषय मे सूचना डाल कर सभी अवैध प्रवासियों को कुर्ला एक्सप्रेस में एक डिब्बा रिज़र्व कर अपने सशस्त्र 14 पुलिस बल संख्या के साथ बांग्लादेश बॉर्डर के लिए रवाना कर दिया ताकि पुलिस देख रेख में इन्हें अपने देश बांग्लादेश वापिस भेजा जा सके .. परन्तु हावड़ा स्टेशन पहुंचने से पहले जिस स्टेशन पर गाड़ी रुकी वहां 900 हथियारबंद मुस्लिम शांतिदूत स्वागत के लिए तैयार खड़े थे... वहां उन्होंने सीधा उसी डिब्बे पर हमला किया जिसमे वो अवैध बांग्लादेशी deport करने के लिए ले जाये जा रहे थे.. 14 पुलिस वालों को अपनी सुरक्षा के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी अगर रेलवे पुलिस बल उनको ना निकालता तो उनकी मृत्यु mob lynching के तहत तय ही थी.. यह सब CPI की सरकार के MP की देख रेख में हुआ 2, 4 दिन बाद उस MP हारून असलम ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि "बंगाली बोलने वालों को बांग्लादेशी करार देने वाली महाराष्ट्र सरकार निरीह मुसलमानों पर जुल्म कर रही है यह बर्बर सरकार है.. हालांकि सर्वविदित सत्य यह है कि महाराष्ट्र सरकार सिर्फ कोर्ट के आदेशों का पालन कर रही थी मज़े की बात है कि तत्कालीन वामपंथी सरकार के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने भी इन अवैध प्रवासियों के हक में बयान दिया.. 1980 से 1991 तक महाराष्ट्र सरकार ने 8113 बांग्लादेशियों को deport करने के लिए पश्चिमी बंगाल में भेजा पर बंगाल बॉर्डर पार करते ही उन्हें छुड़वा लिया गया .. कामरेडिओं का राज गया पर बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों की संख्या इतनी है कि वो जो चाहें वही होगा क्योंकि यह संविधान नाम की बीमारी जो है... 😀

इसी संविधानिक कमज़ोरी को मोमता दीदी ने भुनाया.. मोमता दीदी का कोर वोटर भी अवैध बांग्लादेशी ही हैं इसीलिए आसाम से 40 लाख अवैध घोषित हुए बांग्लादेशियों के हक में नागिन बन फुंकार रही है..😜 अब उन अति उत्साहित भक्तजनों को कुछ कहना चाहता हूं यारों 40 लाख लोग जो 1975 से पहले की नागरिकता साबित नही कर पाए क्या उनका परिवार नही है..? 1975 से अब तक 44 साल बीत चुके हैं, जिस हिसाब से इन बेचारो की प्रजनन गति है उस हिसाब से तो 75 में जन्म लेने वाला कम से कम 5 बच्चे और 25 पोतों वाला तो होगा ही.. तो प्रश्न यह है कि अगर यह अवैध हैं तो इनको किधर भेजोगे...🤔🤔

भारत सरकार अगर यह कहेगी कि ये अवैध बांग्लादेशी या अवैध म्यांमार के नागरिक हैं तो क्या वहां की सरकारें मान लेंगी... और अगर ज़बरदस्ती से इन्हें सीमा के पास खड़ा कर दिया और उधर के देश की सरकार यह कह दे कि ये हमारे नही तो क्या कर लेगी भारत की सरकार..?
उधर इनको गोली मारने का आदेश होगा कि जो भी बॉर्डर क्रॉस करे उसे गोली मार दो.. और फिर क्यों भूल जाते हो कि ये जो 4 साढ़े 4 साल से बिना हड्डी के तड़फ रहे कुछ कुत्ते जो NGO, मीडिया वगैरह के छद्म रूप में हैं वो एक क्षण भी नही लगाएंगे वहां पहुंचने में और फिर अंतराष्ट्रीय दवाब, मानवाधिकार संगठन, जेनेवा समझौता कुल मिला कर 40 लाख औऱ उनकी औलादों को अगर वो देश ना लेना चाहें तो क्या कर लोगे...?? एक भी नही जाएगा, लिखवा लो आज ही ये सब वोट बैंक की राजनीति है ताकि लोगो का ध्यान उधर बंटा रहे, साहब के द्वारा किये गए अनगिनत वादों पर ध्यान ही ना जाए किसी का इसलिए एक शगूफा छोड़ दिया गया है कि लगे रहो बिना काम के काम मे ... 😀😀
हां तो साहब के अंध चमचो आपस में उलझने से कुछ नही होने वाला क्योकि सच्चाई यही है ... शान्ति बना के रहो, जियो और सबको जीने दो, साहब को उनके किये वादे याद दिलाओ 4.4 का हिसाब मांगो जानते हो क्यों क्योंकि पार्टियों में जब जनता का डर निकल जाता है तब ये निरंकुश हो जाती है और जनता महत्वहीन..  अपना महत्व बताओ इन पार्टियों को  ...

जय श्री राम .... जय माँ भारती

Thursday, August 2, 2018

हमारा देश जल रहा है।

मेरे प्यारे देशवासियों,

हमारा देश जल रहा है। इसे बचा लीजिए। इस तमाशे में किसी का भला नहीं है। दंगों की कुछ वजहें होती हैं। उसने पहले फेंका तो उसने बाद में ये कहा। पुलिस उनकी मदद के लिए आई, हमारी मदद के लिए नहीं आई। कहीं गाय का मांस फेंकना तो कहीं सुअर का मांस फेंकना। यह सब तरीका पुराना हो चुका है। आप इन चक्करों में क्यों पड़ते हैं। कई ज़िलों व ज़िलों से रोज़ तनाव की ख़बरें आ रही हैं। इन नेताओं के चक्कर में अपना भाईचारा मत गंवाइये। ये आएंगे और जाएंगे मगर आपको अपने शहर में रहना है। निकलिए चौराहे पर, पड़ोसी का दरवाज़ा खटखटाइये। आवाज़ दीजिए कि आप दंगों की इस मानसिकता के ख़िलाफ़ है। आप हिन्दू हों या मुसलमान थाना पुलिस और मंदिर मस्जिद कर कहीं नहीं पहुंचेंगे। आपके बच्चों पर मुकदमे हो जाएंगे। पुलिस की किताब में घर घर में दंगों के आरोपी हो जाएंगे और आपके नकली गुस्से का लाभ उठाकर नेता ऐश करेगा। सावधान रहिए।

किसी ने कुछ किया भी है तो उसे माफ कर दीजिए। सत्ता फेल हो रही है। इन नेताओं पास आपसे किए गए वादों को लेकर आंखें मिलाने की लाज और हिम्मत नहीं बची है। वो नहीं आ सकते हैं, चीखते हुए कि देखो ये कहा था, वो कर दिया। उन्हें दंगों की लपटों से उठते धुएं का बहाना चाहिए ताकि उसकी आड़ में छिप कर आपका वोट ले जाएं। घर आपका जलेगा, ताज उनके सिर पर चमकेगा।

इसके ख़िलाफ़ या उसके ख़िलाफ़ आपके तर्क सही होंगे मगर आपसी बहस को नफ़रत में मत बदलने दीजिए। ख़ूब गिला शिकवा निकालिए मगर एक दूसरे के दुकानों को मत जलाइये। किसी पर पत्थर मत फेंकिए। किसी की जान मत लीजिए। आप देखिए आपके कॉलेजों की हालत क्या है। लाखों छात्रों का बीए नहीं हो रहा है, किसी को नौकरी नहीं मिल रही है और बहुत चालाकी से ये सभी नेता आपको हिन्दू मुसलमान में उलझा चुके हैं। आपको दंगाई बनाया जा रहा है। आप चाहे हिन्दू हों या मुसलमान हों। दंगाई बनने से रोकिए ख़ुद को। सारे मुकदमे वापस लीजिए और आपस मे गले मिल जाइये।

आप एक अच्छे नागरिक हैं। अब भी वक्त है कि अपने गुस्से से वापस लौट आने का, नफरत वहीं छोड़ कर गले मिलने का। नेता आपका घर जला रहा है तो आप कहां हैं। देश कहां हैं। आप लोग बाहर निकलिए। इस देश को बचा लीजिए। नेताओं को अब सशक्त वोटर नहीं चाहिए, उन्हें दंगों में उलझा हुआ वोटर चाहिए जो उनसे वादों का हिसाब न पूछे बल्कि अपनी किसी अनजाने डर से खुद को सुरक्षित करने के लिए उनपर  निर्भर हो जाए। उम्मीद है आप खुद को समझाने का एक मौका देंगे। ख़ुद को दंगाई बनाने का कोई मौक़ा नहीं देंगे।

आपका अपना

  शुभचिंतक ...  🙏

Wednesday, August 1, 2018

The Forgotten daughter of Rajasthan

The Forgotten daughter of Rajasthan, An inspiring story of 26/11 Mumbai terror attack witness Devika Rotawan

On the night of 26th November 2008, few terrorists entered Mumbai city through the seas and started randomly firing  at innocent people. Many people were shot dead and several others suffered severe injuries. One such girl was Devika Rotawan who was caught in the terrorist firing.

Devika Rotawan”s tale is an inspiring story of The forgotten Rajasthan ki Beti who identified the terrorist Ajmal Kasab in court. 9-year-old Devika was waiting for a train at CST station with her family when she was shot in the legs by Ajmal Kasab on the dreaded night of 26 November and suffered severe injuries.

She was hospitalized and later Mumbai Police managed to capture Kasab alive. But, they could not find any witnesses who were ready to identify him in court. In India, witnesses in judicial trials face a lot of hardships like social boycott, ridicule and mocking by friends, etc. Later, the police approached her father and also Devika to become an eyewitness in the trial. She was only 10 years old.

She immediately agreed. During the trial, she came to court on her crutches and identified Ajmal Kasab as the terrorist who shot people which led to his conviction. However, instead of saluting and admiring the courage and bravery shown by this 10-year-old, her own village members boycotted her and her family. She was given names like Kasab ki Beti by her neighbors. She struggled immensely in her academics as no school was willing to give admission to an eyewitness. Her father faced a lot of hardships in his business as nobody was ready to talk to him fearing attacks by terrorists. He shut down his business. Her brother who was taking care of her in the hospital was asked by hospital authorities to treat other patients without any proper gear. He developed an infection in his spinal cord and now his body shape is deformed. He is not able to lift heavy weights. They left their village and the family came to Mumbai searching for work. Her troubles did not end as her mother passed away in 2006 and now she is also fighting TB. They were promised a permanent flat by the government but they are living on rent. Her dream is to become an IPS officer and end terrorism.

Just 2–3 days back, Rajasthan based NGO Tapovan has come forward and offered financial aid for her studies. They have also offered them a home in Rajasthan”s Ganganagar.